प्रेषक : जीत शर्मा
फिर वो और बाते बताने लगी अपनी बारे में । इस बीच में मेरा हाथ उसके हाथ से लग गया मुझे जैसे करंट लगा पर मैंने हाथ हटाया नहीं और धीरे धीरे सहलाने लगा। वो अपनी बात बताती रही। मैंने धीरे से उसका हाथ अपनी हाथ में ले लिया और बोला कि देखो जिन्दगी बहुत लम्बी है, ऐसे परेशान ना हो और खुश रहना सीखो। मैं जब उसका हाथ सहला रहा था । वो बोली कि मुझे पता है कि तुम क्या करने की कोशिश कर रहे हो?
मैंने कहा- क्या ?
तो बोली कि कुछ नहीं पर मुझे इससे कुछ फरक नहीं पड़ता । यह तो मुझे अपनी बेइज्जती लगी तो मैंने कहा एक मौका दो, तुमको भी फरक पड़ेगा !
तो वो बोली- ठीक है।
मैंने उसके हाथों पर, कंधों पर सहलाना शुरु कर दिया। उसकी सांसें तेज हो गई पर वो अपने आप को सामान्य ही दिखाती रही। फिर मैं उसके पीछे गया और उसके बालों को सहलाने लगा। उसके बालों के नीचे गर्दन पर अपनी गरम सांसे छोड़ने लगा तो वो बुरी तरह गरम हो गई, उसकी सांसे और तेज हो गई और उसकी मोटी मोटी चूचियां ऊपर नीचे होने लगी। उसकी साँसों के साथ मैं उसके सामने आ गया और फिर उसके गले पर ऊँगली से सहलाने लगा तो उसकी आंखे लाल हो गई थी और उसके निप्पल इतनी टाइट हो गए कि उसके सूट के ऊपर से भी नजर आने लगे तो मैंने उसको छोड़ दिया।
वो बोली- क्या हुआ ?
तो मैंने कहा- तुमको तो कुछ होता ही नहीं है, पर मेरी हालत खराब हो रही है !
तो बोली कि जीतू आज ३ साल बाद फिर से किसी ने मुझे इतना गरम किया है ऐसे छोड़ कर मत जाओ, मुझे माफ़ कर दो मेरी प्यास बुझा दो।
मैंने कहा कि लो मेरा लण्ड चूसो !
तो वो फट से तैयार हो गई और मेरा 6.5″ इंच लम्बा लंड निकाल कर …
पूरी कहानी यहाँ है !
