राजू से मेरी पहली चुदाई
Wednesday, November 5th, 2008मैं दूसरे दिन छोटी स्कर्ट पहन कर और अन्दर एक छोटी सी पेंटी पहन कर बड़ी तैयारी के साथ इंतज़ार करने लगी. पेंटी इतनी छोटी थी कि झुकने पर पूरी चूतड दिख जाती थी. टॉप ढीला सा ..जो ऐसा था कि आधे बूब्स तो जरा सी कोशिश करने से ही नज़र आ जाते थे. मुझे लगा राजू के लिए इतना बहुत था.
राजू सर ८.३० पर आ गए. मेरे पापा ने उन से बात की …..फिर मुझे बैठक मैं बुला लिया.
पापा मम्मी ऑफिस की तैयारी करने लगे. राजू ने मुझे देखा तो वो देखता ही रह गया.
उसे घूरते देख कर मैं मन ही मन मुस्करा उठी. तीर निशाने पर लगा था.
मैंने कहा – “सर , आज कहाँ से शुरू करें …”
“हाँ हाँ बैठो ..पहले बुक्स ले आओ ..”
“मैं बुक लेकर आयी और सर के सामने उसे गिरा दिया. फिर उसे उठाने के लिए मैंने चूतड राजू की तरफ़ कर दिए और झुक गयी. मेरी गांड की दोनों गोलाईयां और छोटी सी पैंटी उसे दिखने लगी होगी. मैंने उसे तिरछी नज़र से देखा …तो मेरे चूतड की तरफ़ ही देख रहा था ….. उसे पसीना आ गया था … मेरा दिल भी ये सोच कर धड़कने लगा कि उसने पूरा देख लिया है. मैंने टेबल पर किताब रख दी.
मेरी नज़र उसकी पेंट पर चली गयी , जहाँ उसका लंड खड़ा हो रहा था…..
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