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छोटे गाँव की मालती

मेरा नाम रोहन है, मैं 25 वर्ष का ऊंचे कद, चौड़ी छाती वाला एक तंदरुस्त जवान हूँ और पंचकूला में अपनी 23 वर्षीय पत्नी पूनम तथा छह माह के बेटे के साथ रहता हूँ। मैं चंडीगढ़ में एक आई टी कंपनी में काम करता हूँ जहाँ मुझे बहुत ही अच्छा पारिश्रमिक मिलता है। तीन वर्ष पहले मेरा विवाह हुआ था और तब से मैं अपनी पत्नी पूनम के साथ पंचकूला में दो बेडरूम वाले घर में ही रहता हूँ।
पंचकूला आने के बाद मेरी पत्नी ने घर के काम काज करने के लिए मालती को नौकरी पर रख लिया था। मालती को सुबह सात बजे से लेकर शाम के सात बजे तक पूरे दिन के लिए घर का सारा काम करने के लिए रखा हुआ है। इसी कारण मेरी पत्नी ने उसे घर के बाहर के दरवाज़े की एक चाबी भी दी हुई है ताकि जब भी वह आये तो दरवाज़ा खोल सके तथा जब बाहर जाए तब ताला लगा कर जाए।
मालती हरियाणा के एक छोटे से गाँव की रहने वाली है और उसकी उम्र लगभग 25 साल की होगी। वह दो बच्चों की माँ होने के बावजूद देखने में काफी खूबसूरत है, उसका रंग हल्का गेहुआँ है, चेहरा गोल है और नाक पतला है, आँखें बड़ी बड़ी हैं लेकिन बहुत ही आकर्षक व नशीली हैं !
दो बच्चे होने के बाबजूद भी सारा दिन मेहनत का काम करने के कारण उसका बदन गठा हुआ है! मालती काम पर ज्यादतर धोती तथा ब्लाउज ही पहन कर ही आती है जिसके नीचे वह पैंटी और ब्रा नहीं पहनती है। उसके महीन ब्लाउज में से उसके उठे हुए बड़े बड़े गोल और सख्त मम्मों की झलक दिखाई देती है, क्योंकि उसका ब्लाउज ढीला ढाला होता है इसलिए जब भी वह झुक कर फर्श की सफाई करती है तो उसके दोनों मम्मे और उनके ऊपर की काली डोडियां साफ़ नज़र आती हैं।
पिछले वर्ष मेरी पत्नी पूनम जब गर्भवती थी, तब वह छह माह के लिए मायके रहने चली गई थी। पूनम के जाने के बाद मालती उसके समझाए अनुसार मेरे खाने पीने और घर के दूसरे काम को बहुत ही अच्छे तरह से करती रही। दिन तो मैं ऑफिस चला जाता था और रात में थके होने के कारण जल्द ही सो जाता था।
एक सप्ताह तक तो इसी तरह निकल गया लेकिन शनिवार की शाम मुझे पूनम की कमी महसूस हुई !
रात देर तक जब नींद नहीं आई तब मैं डीवीडी प्लयेर में एक ब्लू फिल्म की डीवीडी लगा कर टीवी पर आराम से नंगा होकर देखता रहा। फिल्म देखने के दौरान मैंने दो बार मुठ भी मारी और हर बार पास रखे तौलिए से लौड़े को साफ़ भी करता रहा !
टीवी देखते देखते मुझे नींद आ गई और मैं टीवी चलता हुआ छोड़ कर नंगा ही बिस्तर पर सो गया। यह कहानी आप अन्तर्वासना.कॉम पर पढ़ रहे हैं।
अगला दिन इतवार था फिर भी हर रोज की तरह मालती सुबह सात बजे आ गई, लेकिन उसके आने का मुझे पता ही नहीं चला और मैं अपने कमरे में नंगा ही सोता रहा !
नौ बजे के लगभग जब मालती ने मेरे कमरे का दरवाज़ा जोर से खड़काया तब मेरी नींद खुली और इससे पहले कि मैं अपने आप को संभालता, वह अचानक ही कमरे में घुस आई !
मैंने जल्दी से तौलिया उठा कर अपने बदन को ढका और मालती की ओर देखा तो पाया कि वह मुस्करा रही थी। जब मैंने उससे मुस्कराहट का कारण पूछा तो उसने बताया कि सुबह आठ बजे मेरे कमरे में आई थी तभी उसने मुझे नंगा सोते हुए देख लिया था और तब उसने कमरे की सफाई करके लाईट और टीवी बंद कर दिया था।
मैंने चारों ओर नजर दौड़ाई तो देखा कि कमरे का हर सामान करीने से रखा हुआ था तो मुझे विश्वास हो गया कि मालती कमरे की सफाई करते समय ज़रूर मुझे नंगा सोते हुए देख चुकी थी और मैं शर्म से झेंप गया।
मैं अपनी शर्म और झेंप से उभर ही नहीं पाया था कि मालती ने मुझे मेरी लुंगी देते हुए कहा कि मैं उसे पहन लूं और तौलिया उसे धोने ले लिए दे दूं क्योंकि उस पर मेरा ढेर सारा माल लगा हुआ था। मालती की वह बात सुन कर तो मैं पानी पानी हो गया और मुझे लगा कि मेरी रही सही इज्ज़त भी मिटटी में मिल गई थी। खैर मैं लुंगी पहन कर और फ्रेश होकर अपने कमरे से बाहर आया तो देखा कि मालती रसोई में आलू की सब्जी बना चुकी थी और मेरे लिए पूड़ी तल रही थी।
मैं खाने की मेज पर बैठ गया और चुपचाप मालती द्वारा दिया गया नाश्ता खाता रहा। मुझे गुमसुम देख कर मालती ने मेरी चुप्पी का कारण पूछा तो मैं टाल गया और चाय पीकर अपने कमरे में चला गया।
मैं अपने कमरे में पहले तो टीवी देखता रहा और फिर लैपटॉप कुछ काम करता रहा। उधर मालती रसोई की सफाई, कपड़ों की धुलाई और घर का बाकी काम निपटाती रही !
दोपहर को एक बजे जब मालती मेरे कमरे में खाने के लिए बुलाने आई तो मैंने उसे कह दिया कि वह खाना बना कर रख दे।
इस पर उसने कहा कि वह साथ वाले कमरे में ही सुस्ता रही है और मैंने जब भी खाना खाना हो उसे बुला लूँ वह बना कर परोस देगी। लगभग आधे घंटे के बाद जब मुझे भूख लगी तब मैंने मालती को आवाज़ दी लेकिन वह नहीं आई तो मैं उसे देखने के लिए साथ वाले कमरे में गया तो उसे जमीन पर सोया हुआ पाया। उसकी धोती का पल्लू उसके सीने पर से हटा हुआ था और उसके कसे हुए मम्में उसके झीने से ब्लाउज में से साफ़ दिखाई दे रहे थे ! उसकी एक टांग सीधी थी और दूसरी टांग ऊँची कर रखी थी जिसके कारण उसकी धोती सरक कर थोड़ा ऊपर गई थी तथा उसकी जांघें नंगी हो रही थी! उसकी नंगी जाँघों की नरम और चिकनी त्वचा देख कर मुझ से रहा नहीं गया और मैंने झुक के उसकी टांगों के बीच झाँकने लगा। अँधेरा होने की वजह मुझे कुछ ज्यादा साफ़ साफ़ तो नज़र नहीं आया लेकिन इतना जरूर पता चल गया कि मालती ने पेंटी नहीं पहनी हुई थी।
मालती को उस हालत में सोते हुए देख कर मेरे लौड़े ने सलाम करना शुरू कर दिया, मैं उत्तेजित हो गया इसलिए जल्दी से अपने बाथरूम में जा कर मुठ मारने लगा।
शायद मालती मेरे कदमों की आवाज़ सुन ली थी इस लिए वह मेरे पीछे पीछे मेरे कमरे में आ गई और बाथरूम के दरवाज़े के बाहर खड़ी हो गई। क्योंकि मैं बाथरूम का दरवाज़ा बंद करना भूल गया था इसलिए मालती को मेरे मुठ मारने का नज़ारा साफ़ दिखाई दे रहा था।
मैं उसे वहाँ खड़ा देख कर दंग रह गया और मेरे मुँह से आवाज़ नहीं निकली।
तब मालती बाथरूम के अंदर मेरे पास आई और पूछा- क्या आप बीबी जी की याद में मुठ मार रहे हैं?
मैंने कहा- हाँ !
मालती- लाओ, मैं आप की मदद कर दूँ !
मैं- नहीं, मुझे तुम्हारी मदद नहीं चाहिए !
मालती- बीबी जी भी तो आपकी मदद करती हैं ना !
मैं- तुम्हें कैसे मालूम?
मालती- मैंने कई बार आप लोगों को ऐसा करते हुए देखा है !
मैं- क्या तुम ऐसा कर पाओगी?
मालती- क्यों नहीं, मैं अपने मर्द की मदद भी तो करती हूँ !
मैं- क्या तुम्हें शर्म नहीं आएगी?
मालती- शर्म किस बात की, लौड़ा ही तो हिलाना है !
इतना कह कर मालती ने मेरा लौड़ा पकड़ लिया और उसे हिलाने लगी !
उसके हाथ का स्पर्श ने जैसे जादू कर दिया और दो ही मिनट में ही में मेरे मुँह से आह्ह... आह्ह्ह... आह्ह्ह... की आवाज़ निकलने लगी। उस आह्हह्ह... की आवाज़ सुनते ही मालती अकस्मात झुकी और मेरे लौड़े को अपने मुँह में ले लिया और उसमें से निकल रहे सारे रस को पी लिया !
मैंने जब उससे पूछा कि उसने ऐसा क्यों किया तो उसने बताया कि वह मेरे रस का स्वाद अपने पति के रस के स्वाद के साथ तुलना करना चाहती थी !
मेरे पूछने पर कि उसे क्या अंतर महसूस हुआ तो उसने बताया कि उसके पति का रस पतला है जबकि मेरा रस बहुत गाढ़ा है। उसके पति का बहुत थोड़ा सा रस निकलता है जबकि मेरा बहुत सारा रस निकला था। उसके पति के रस का स्वाद नमकीन है जबकि मेरा रस कुछ मीठा और कुछ नमकीन है।
मेरे पूछने पर कि उसे कौन सा रस पसंद आया तो उसने बताया कि निश्चित रूप से उसे मेरा रस ज्यादा स्वादिष्ट लगा।
इसके बाद मैंने लुंगी पहनी और मालती को पकड़ कर कमरे में ले आया और उसे खींच कर अपने पास बिस्तर पर बिठाया लेकिन वह एकदम से खड़ी हो गई और कहने लगी कि यह बिस्तर तो उसकी बीबी जी का है इसलिए वह उस बिस्तर पर बिल्कुल नहीं बैठेगी।
तब मैंने उसे जबरदस्ती से अपनी गोद में बिठा लिया और उसके चेहरे को अपने हाथों में ले कर अपने होंठ उसके होंठों पर रख कर उसे चूमने लगा।
पहले तो मालती ने विरोध किया लेकिन फिर जैसा मैं उसके होंटों के साथ करना चाहता था उसने करने दिया !
थोड़ी देर चूमने के बाद मैंने उससे कहा- तूने तो मेरा सब कुछ देख व छू लिया है और मेरा रस भी पी लिया है, अब तू मुझे अपना बदन नहीं दिखाएगी?
तब उसने कहा- यह कमरा बीबी जी का है इसलिए इस कमरे में ना तो अपना कुछ दिखाऊँगी और ना ही कोई भी गलत काम करूँगी!
उसकी यह बात सुन कर मुझे प्रसन्ता हुई कि वह कम से कम वह मेरे साथ कुछ तो गलत काम करने को तैयार थी इसलिए मैंने उस हल्की फुल्की मालती को गोद में उठाया और दूसरे कमरे में ले जाकर बिस्तर पर लिटा दिया तथा पास में ही खड़ा होकर उसकी प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा करने लगा।
जब कुछ देर तक मालती बिना कुछ बोले और बिना हिले डुले वैसे ही बिस्तर पर लेटी रही तो मुझ से नहीं रहा गया और उससे पूछा कि क्या वह अपना बदन मुझे दिखाएगी?
मेरे प्रश्न के उतर में मालती ने अपनी धोती का पल्लू खोल कर मेरे हाथ में दे दिया और कहा कि मुझे जो कुछ भी देखना है खुद ही देख लूँ, वह कोई आपत्ति नहीं करेगी।
मैंने उसका पल्लू एक तरफ रख कर उसके पास बैठ गया और उसके ब्लाउज के बटन खोल कर उसके मस्त मम्मों को दोनों हाथों में पकड़ कर दबाने लगा। जब मैं उसकी डोडियों को उंगली और अंगूठे के बीच में ले कर मसलने लगा तब वह आह... आह... सीई ईई... सीईईई... करने लगी।
मैं समझ गया कि वह गर्म होना शुरू हो गई थी इसलिए मैंने उसके मम्मों को छोड़ दिया और उसके पल्लू को पकड़ कर उसकी धोती उतार दी। उसकी धोती उतरने के बाद मैंने उसके पेटीकोट का नाड़ा खींच कर खोला और उसके साये को पकड़ कर उतारने लगा। उसने भी मेरा साथ दिया और अपनी कमर तथा नितम्बों को ऊंचा कर के पेटीकोट को अपनी टांगों से अलग करने में पूरा सहयोग दिया तथा अपना ब्लाउज भी बदन से अलग कर दिया।
अब वह मेरे सामने बिल्कुल नग्न लेटी हुई थी और बहुत ही आकर्षक लग रही थी। खिड़की के पर्दों में से छन कर का आ रही धूप में उसका हल्का गेहुएं रंग को सोने की तरह चमक रहा था। उसके दोनों मम्में किसी इमारत के गुम्बज की तरह सिर उठाये सीधे खड़े थे, उन मम्मों के ऊपर लगी काली डोडियाँ एकदम सख्त हो गई थीं और मुझे न्योता दे रही थी। उसकी चूत पर उगे हुए गहरे भूरे रंग के बालों का समूह किसी समुन्दर में एक द्वीप की तरह लग रहे थे। उसकी पतली कमर और सुडोल जाँघों ने मुझे मजबूर कर दिया और मैं उसके बदन पर टूट पड़ा !
पहले मैंने उसके बदन को हर जगह चूमा, फिर उसके चुचूकों को दांतों से काटा और कस कर चूसा भी ! यह कहानी आप अन्तर्वासना.कॉम पर पढ़ रहे हैं।
वह सी... सी... कर चिल्लाने लगी तो मैं और उत्तेजित हो गया तो मैंने उसकी जाँघों के बीच में हाथ डाल दिया और उसकी चूत में उंगली करने लगा।
उसने अपनी टांगें चौड़ी कर दीं, तब मैं उसकी चूत में दो उँगलियाँ डाल कर अंदर-बाहर करने लगा।
वह हाय.. हाय.. और सीसी.. सीसी.. करने लगी और कमर तथा नितम्बों को हिलाने लगी थी। पांच मिनट के बाद उसने अकड़ कर एक ऊइ ईई... आह्हह... की चीख मारी और मेरा हाथ को अपने पानी से गीला कर दिया !
मैंने जब उसकी ओर घूर के देखा तो वह हंस रही थी और बोली- साब, इतनी तेज़ी से उंगली करोगे तो यह होना ही था ! मुझे इतनी तेज़ी से खिंचावट हुई कि मैं पानी रोक नहीं सकी !
फिर ऊँची होकर उसने कहा- “साब, ये तो नाइंसाफी है, मैं तो नंगी पड़ी हूँ और आपने कपड़े पहने हुए हैं ! आइए मैं उतार दूँ !
कह कर वह झट से उठ गई और मेरी बनियान और लुंगी उतार कर दूर फेंक दी और मेरे अंडरवीयर को नीचे सरकाने लगी और साथ साथ नीचे बैठती गई !
जैसे ही मेरा अंडरवीयर मेरे पांव तक पहुँचा, मेरा खड़ा लौड़ा उसके मुँह के पास पहुँच गया। उसने झट से मेरे लौड़े को अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी तथा मेरे अंडरवीयर को मेरे पाँव से निकाल कर लुंगी के पास फेंक दिया !
दो मिनट में ही मैं महसूस किया कि वह बहुत अच्छा तरह चूसती है क्योंकि वह कभी तो मेरे सुपाड़े को चूसती और कभी पूरे लौड़े को गले तक लेजा कर आगे पीछे करती जिससे दोनों चुसाई तथा रगड़ाई के मजे एक साथ मिलने लगे।
मैं खड़ा हो उससे लौड़ा चुसवाता रहा और जैसे ही वह मेरे लौड़े को अपने गले में उतारती मैं आगे पीछे हिल कर उसके मुँह को चोद लेता। करीब पांच मिनट के बाद मैंने उसे बिस्तर पर लिटा कर अपना लौड़ा उसके मुँह डाल दिया और उसकी चूत पर अपना मुँह रख कर चूसने लगा।
मालती तो लौड़े को उसी तरह चूसती रही लेकिन मैं कभी उसकी चूत के अंदर जीभ डाल कर अंदर बाहर करता तो कभी उसकी चूत के होंटों को चूसता और कभी उसके दाने को जीभ से रगड़ता।
यह सब लगभग दस मिनट चलता रहा और फिर जब मैं मालती के दाने से खेल रहा था तब उसने कहा कि वह पानी छोड़ने वाली है तो मैंने अपना मुँह उसकी चूत से चिपका लिया और उसके निकलते हुए पानी को पी गया !
इसके बाद मालती ने कहा- साहब, मैं बहुत गर्म हो चुकी हूँ और मुझे चूत में बहुत खुजली हो रही इसलिए आप जल्दी से अपने लौड़े को मेरी चूत में डाल कर मेरी चुदाई कर दें !
मैंने कहा- ऐसी भी क्या जल्दी है?
मालती बोली- साहब, जब औरत की चूत में आग लगी हो तभी मारनी चाहिए ! इससे चूत मारने वाले और मरवाने वाले दोनों को ही मजे आते हैं।
मैं अच्छा कह कर मालती के ऊपर चढ़ गया और उसकी दोनों टाँगें फैला दी, तब मालती ने अपने एक हाथ से चूत का मुँह खोल दिया और दूसरे हाथ से मेरे लौड़े को पकड़ कर उसमें बिठा दिया तथा मुझे धक्का मारने को कहा।
मैंने कस के धक्का लगाया तो मेरे लौड़े का सुपारा उसकी चूत के अंदर चला गया और वह सीसीइइइ...सीसीइइइ... करने लगी।
मैंने पूछ- क्या दर्द हो रहा है?
वह बोली- जब एक इंच पतले लौड़े से चुदने वाली चूत में ढाई इंच मोटा लौड़े को झटके से डालोगे तो दर्द तो होगा ही !
मैं बोला- तुमने ही तो धक्का मारने को कहा था।
मालती बोली- मुझे इस दर्द का अंदेशा था इसीलिए इसको सहन भी तो कर लिया है!
मैं बोला- निकाल लूँ क्या?
मालती बोली- नहीं बिल्कुल नहीं ! मैं तैयार हूँ, आप धक्के मारो और लौड़े को पूरा अंदर बाड़ दो।
मैंने उसके कहे अनुसार एक जोर का धक्का लगाया और पूरा का पूरा लौड़ा उसकी चूत के अंदर कर दिया। लौड़े के अंदर घुसते ही वह चिल्ला उठी उईई... उईईइ... हाईईईई... हाईईई... मरगईईई माँअआ अआ... हाय मार डाला रेएएए...!
मैंने पूछा- क्या हुआ?
मालती बोली- होना क्या है, मुझे मार डाला आपने ! मेरी चूत ने आज तक सिर्फ पांच इंच लम्बा लौड़ा ही लिया था लेकिन आपके आठ इंच लंबे लौड़े ने एक झटके में ही अंदर घुस कर मेरी बच्चेदानी तक चोट मारी है !
मैंने कहा- तुमने ही तो कहा था कि धक्का मारो और इस पूरा अंदर डाल दो !
मालती बोली- लेकिन मैंने यह नहीं कहा था कि एक ही झटके में हलाल करो ! दो तीन धक्कों में घुसेड़ते तो इतनी तकलीफ नहीं होती !
मैंने कहा- अब बाहर निकाल लूँ?
मालती बोली- नहीं, जो होना था सो हो गया, अब तो मजे लेने की बारी है ! आप अब आराम से जी भर के धक्के मारो !
इतना सुनते ही मैंने मालती की चुदाई शुरू कर दी और आराम से लौड़े को उसकी चूत के अंदर बाहर करने लगा ! मालती को भी अब मजे आने लगे थे, वह चूतड़ उठा उठा कर हर धक्के में मेरा साथ दे रही थी और उसकी चूत बहुत ही कसी हो गई, जिससे दोनों के लिंगों को खूब रगड़ लग रही थी।
दस मिनट तक इसी तरह चुदने के बाद मालती ने आह्ह... आह्हह्ह... की आवाज़ निकालते हुए अपना पानी छोड़ा और चूत में से पच्च... पच्च...  की आवाज़ आने लगी। इस पच्च... पच्च... की आवाज़ सुन कर मैं उत्तेजित हो गया और मैंने चुदाई की गति तेज कर दी। मालती भी शायद यही चाहती थी क्योंकि उसने भी चूतड़ उठाने की रफ्तार मेरे धक्कों के बराबर तेज कर दी। जब अगले पन्द्रह मिनट तक मैं मालती को तेज़ी से चोदता रहा तब उसने कहा- साहब, और तेज़ी से मारो, मैं अब छूटने वाली हूँ !
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मेरा पहला ट्यूशन

जॉन सिंह
सभी पाठकों को नमस्कार
बात उन दिनों की है जब मैंनें ईन्जीनियरिंग में एडमिशन लिया ही था मेरी उमृ 19 साल थी मेरी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी अतः अपना खर्च चलाने हेतु मैंने ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया मैं किराये से कमरा लेकर रहता था शुरूआत में मैंने कक्षा 11 की 3 लड़कियों को पढ़ाना शुरू किया रीमा, निशा और अंजलि धीरे धीरे छात्राओं की संख्या बढने लगी व संख्या बढकर 13 हो गई पहले मैं अश्लील बातों के बारे में सोचता भी न था धीरे -2 दोस्तों की संगति में आकर मेरे मन में भी अश्लील ख्याल आने लगे सबसे पहले मुझे हस्तमैथुन की आदत लगी कोलेज की मस्त गांडों, चूतों के बारे में सोचकर मैं मुठ मारने लगा एक रात में मुठ मारते मारते सोचन लगा कि वास्तव में चूत कैसी होती होगी क्या उससे भी लंड की तरह पानी निकलता होगा मैं अपने पर ट्यूशन आने वाली लड़कियों की गांड व चूत को भी निहारने लगा क्योंकि ज्यादातर लड़कियाँ जींस व टाॅप पहन कर आती थीं जिन में से उनकी गांड को नुमाया जा सकता था
इसी तरह 10-12 दिन तक चलता रहा फिर एक दिन मेरी छात्रा अंजलि की वर्थ डे पार्टी में मुझे इन्वाईट किया गया अंजलि की उमृ 18 साल थी लेकिन गजब की गोल मटोल गांड थी हुबहू कैटरीना जैसा फिगर था उसका उसकी. दिसंबर का महीना था मैं रात 9 बजे अंजलि के घर पहुंचा पार्टी रात 12 बजे तक चली.. उसके बाद मैं अपने कमरे पर पहुंचने के लिए जाने लगा. तो अंजलि के माता पिता ने मुझे वहीं रुकने को कहा तो मैं रुक गया रात का 1 बज चुका था उस दिन कडाके की सर्दी थी सभी लोग हारे थ. थके थे जिसको जहां जगह मिली वहीं सो गया मैं भी अंजलि के कमरे में सो गया संयोग से उस कमरे में कवल हम तीन लोग थे मैं अंजलि और अंजलि का छोटा भाई अतुल जो 12 वर्ष का था. अंजलि, उसका भाई और मैं जमीन पर ही रजाईयाँ ओढकर सो गये अंजलि के दाहिने ओरमैं और बांई ओर उसका भाई जो किउसी की रजाई में था. रात के ढाई बजे चुहे के मेरे ऊपर चढने के कारण मेरी नींद खुल गई अचानक मैंनें देखा अंजलि मेरी तरफ गांड करके सो रही है और रजाई उसके ऊपर से हट चुकी है कमरे में हल्की सी रोशनी थी मेंने देखा कि सभी लोग गरी नींद में थे अंजलि की सफेद सलवार में से गा की दरार को मैं ध्यान से देखने लगा. मुझ से रहा न गया मैंने अपनी रजाई में अंजलि को ले लिया. फिर उसकी सलवार का नाङा खोला और उसकी पैंटी भी उतार दी वो ईतनी गहरी नीद में थी उसके कान पर जूं तक न रैंगी फिर मैं उसके चूतडों पर हाथ फिराने लगा तथा बीच बीच में हल्की सी ऊंगली गांड में लगभग आधा ईंच डाल देता 5 मिनट तक में ये करता रहा उसके बाद नींद में ही वो हल्की सी सी... सी... की अवाज के साथपीछे की ओर गांड धकेल देती धीरे धीरे मैंने उसको चित लिटाया और उसकी चूत पर हाथ ले गया चूत बिल्कुल क्लीन सेव थी एक भी बाल नहीं था शायद हेयर रिमूवर से उसने साफ कर रखी थी. हल्के से मैं एक ऊंगली चूत की दरार पर ले गया और उसकी भगनशा को छुआ उसने एक लम्बी सीत्कार के साथ दोंनों पैरों को भींच लिया मानो वह ऊंगली को अंदर ले जाना चाहती हो और दूसरी ओर करवट बदल ली मैंने सोचा शायद वह जाग गई मैंने अपनी ऊंगली तुरंत वापस ले ली लेकिन वह जागी नहीं थी. मैं गर्म हो चुका था . उसकी गांड पर सटाया और घसीटने लगा 10 मिनट तक घसीटने के बाद मैंने पानी उसके चूतडो पर छोड दिया उसकी चड्डी ऊपर सरकाई सलवार भी चार बज चुके थे मैं मन में यह सोचकर कि किसी न किसी दिन मैं अपने लंड का पानी तेरी चूत में छोडकर चूत को भौसडा जरुर बनाऊंगा सो गया. सुबह मैं अपने कमरे पर पहुंचा फिर कालेज गया कालेज से लोटते समय मैंने कुछ एङल्ट बुक व एक रेजर खरीदा शाम 5 बजे मैं रुम पर पहुंचा तो वहां लड़कियाँ खडी थी मैंने रुम का ताला खोला पालिथिन एक तरफ रखी और ट्यूशन पढ़ाने लगा ट्यूशन पढ़ाने के बाद खाना खाया रात 10 बज चुके थे मैंने पालिथिन से रेजर निकालकर झांटें साफ की फिर एडल्ट बुक पडते पडते मुठ मार लिया बार बार मेरे मन में यही ख्याल आ रहा था कि केसे अंजलि को चोदा जाए . 15-20 दिन तक यों ही चलता रहा फिर मेरे मूड में एक प्लान आया और मैंने सभी लड़कियों को पिकनिक पर ले जाने को कहा कुछ के घरवालों ने नहीं जाने दिया केवल 4 लड़कियाँ तैयार हुई अंजलि भी उनमें से एक थी सुबह 10 बजे हम सब निकले मैंने जाते समय कुछ सैक्स पावर बढाने की टेबलेट भी रख ली क्योंकि मेरा मक्सद अंजलि को जमकर चौदना था पिकनिक पर शाम के 6 बज गए सर्दी की बजह बताकर मैंने वहीं रुकने को कहा वास्तव में मेरा मक्सद अंजलि को चोदना था. हम सब ने एक लौज में दो कमरे बुक किए खाना खाने के बाद मैंने पानी में नींद की गोलियाँ मिला दीं मैं और अंजलि एक ही कमरे में सो गए शायद अंजलि का मूड भी चुदने का हो रात 1 बजे अंजलि सो चुकी थी मैं खडा हुआ दो टेबलेट खांई और अंजलि की रजाई में घुस गया वाे चित सो रही थी मैंने धीरे से उसकी जींस का बटन व चैन खोल के नीचे सरकाया फिर अपना हाथ उसकी चढ्ढी में डालकर चूत में उगली चलाने लगा और कभी-2 उसके बूब्स भी दबा देता. 5 मिनट बाद वो लम्बी-2 सीत्कार के साथ कसमसाने लगी वो सचमुच में जाग चुकी थी और सोने का नाटक कर रही थी मैंने कहा अब नाटक बंद करो और मजे लो उसन आंखें खोल लीं. मैंने उसके सारे कपड़े उतारे और अपने भी फिर मैंने उसको चूमना और बूब्स दबाना शुरु किया वो भी मेरे लंड को सहलाने लगी मेरा लंड कडा हो गया एवं उत्तेजना भरने लगी शायद टेबलेट ने भी अपना असर शुरू कर दिया था वो भी गर्म हो चुकी थी उसकी गुलाबी चूत से पानी रिसने लगा मैंने कहा पहले मैं तेरी गांड में पेलूंगा बहुत दिनों से ललचा रही है साली वो राजी हो गई चुदाई के मामले में हम दोंनों अनाडी थे दोंनों का पहला अनुभव था क्या पता क्या होगा मैंने उसके नीचे रजाई रखकर उसे उल्टा लिटाया गांड ऊपर उचका कर तने हुए लंड का सुपाडा छेद पर लगाकर जोर लगाने लगा लंड गांड में पिल नहीं रहा था बहुत जोर लगाने पर एक ईंच लंड घुस गया उसकी चीख निकली मैं अपने हाथों से उसका मुँह बंद कर दिया ताकि कोई सुन न ले वो मेरा विरोध करने लगी लेकिन मैंने जकडं कर जोर लगाना जारी रखा लंड अंदर जा नहीं रहा था थौडी देर बाद मैंने लंड बाहर निकाला और दुबारा डालने को कहा वो राजी नहीं हुई तो मैंने उसे 10 मिनिट तक समझाया साथ-2 उसकी चूत भी सहलाई तब वो राजी हुई ईस बार मैंने सोचा साली कुछ भी करे पेल कर ही रहुंगा ईस बार मैं उसकी गांड में बहुत सारा थूंक व लार भर दी व लंड से रिस रहे पानी को लंड पर लपेट लिया लंड चिकना हो गया जैसे ही मैंने लंड गांड में लगाकर जोरदार झटका मारा सड्क से एक ही झटके में चार ईंच लंड पिल गया मैंने उसको तेजी से दोंनों टांगों के बीच दबाकर उसके मुंह पर हाथ रख लिये उसकी आंखें फटी रह गईं तथा तडफडाने लगी जैसे कोई यउसका बलात्कार कर रहा हो 5 मिनिट तक मैं उसी अवस्था में दबोंचे रहा फिर थौडा-2 लंड हिलाने लगा फिर धीरे -2 आगे पीछे करने लगा अब तक वह भी गांड को हल्का सा हिलाने लगी यह देख मैंने बाकी लंड भी पेल दिया छह ईंच लंड उसकी गांड में समा गया मैंनें धक्कों की गति तेज कर दी वह भी गांड पीछे की ओर धकेल -2 कर मजा लेने लगी 10 मिनिट बाद मैं झडने वाला था मैंने लंड गांड से खींच मुंह में पेल दिया एकदम पिचकारी सी उसके मुंह में छूटी उसका मुंह गले तक भर गया मैंने इसे निगलने को मना किया और पूरा उसकी ही चूत पर कुल्ला करवा दिया फिर मैंने चूत में उंगली अंदर बाहर करने लगा 15 मिनिट तक मैंनें यह जारी रक्खा उसके बाद वह गर्म हो कर कहने लगी सी... सी... चौद दो मुझे मैंने देर न की लंड का सुपाडा चूत पर रख कर तेजी से झटका मारा चूत पहले से ही गीली थी एक ही झटके में पूरा लंड अंदर चला गया उसके आंसू निकल आए तथा चूत खून बहने लगा चूत गर्म गर्म भट्टी की तरह तप रही थी मैंने धीरे -2 धक्के लगाना शुरु किया थौडी देर बाद वह भी चूतड उठा -2 कर आ...ह सी... चौदो जौर से आ...ह्..ह और जौर से मैं भी जाने क्या क्या आज तो फाड दूंगा भौसडा बना दूंगा वकने लगाउसकी छूटने वाली थी उसने तेजी से मुझे भींचा और चिपक गई लेकिन मैं धक्के लगाता रहा वो झड चुकी थी 15 मिनिट बाद वो कहने लगी बस पर मैं लगा रहा वह रोने लगी...मैंने कहा रंडी साली पिलवा और तेज धक्के लगाने लगा तेजी से मेरे लंड से पिचकारी छूटी और उसकी चूत लबालब भर गई मैंने तेजी से उसे भींच लिया फिर शरीर ढीला छोड दिया 20 मिनिट तक में लेटा रहा लंड चूत में ही पिला था अचानक मुझे पेशाब लगी ठंड के मारे खडा होने का मन नहीं हुआ तो चूत में ही पेशाब कर दी सुबह 6 बजे तक मैंने उसे तीन बार चौदा सुबह उसकी आंखें लाल हो रहीं थी दर्द के मारे उससे चला भी न जा रहा था
सुबह मैंने उसे उसके घर छोडा कहा कि ठंड के कारण बीमार हो गई है वह किसी को बता भी नहीं पा रही थी अगले 15 दिन तक वह ट्यूशन नहीं आई.. 16 वें दिन आ...आगे ओर भी है आगे की कहानी शीघृ ही भेजूंगा बताउगा कितनों को कि पृकार चौदा तब तक के लिए खुदा हाफिज नमस्कार...

मेरे जीजू और देवर ने खेली होली-1

लेखिका : फुलवा
मैं अपने मम्मी-पापा के साथ सोनीपत में रहती हूँ। मेरी एक बड़ी बहन माला जिसकी शादी को अभी आठ महीने ही हुए हैं दिल्ली में है। जीजू रोहित का कपड़े का एक्सपोर्ट बिजनेस है। मेरा रिश्ता भी दिल्ली में तय हो चुका है और मेरे होने वाले पति सुमित बंगलौर में सॉफ्ट वेयर इंजीनियर है। मेरे पापा का सोनीपत में बिज़नेस है।
अप्रैल में मेरी शादी निश्चित हुई है। शादी की खरीदारी के लिए मैं मम्मी के साथ दिल्ली आई हुई हूँ दीदी-जीजू के पास। जीजू बहुत मस्त हैं, दीदी को पांचवां महीना चल रहा है इसलिए उनसे तो घर का काम होता नहीं, मम्मी ही अक्सर रसोई में लगी रहती हैं। बाकी कामों के लिए एक नौकरानी रखी हुई है। जीजू मेरे साथ अक्सर छेड़छाड़ करते रहते हैं। कई बार मेरे गालों को चूम लेते है और एक-आध बार तो मेरे स्तन भी दबा चुके हैं दीदी के सामने ही, दीदी भी कुछ नहीं कहती।
एक दिन दीदी के सामने ही जीजू ने कहा- नीतू अब तो तेरी शादी होने वाली है, शादी के बाद क्या होना है, तुझे पता है? कोई एक्स्पेरियंस है तुझे? मुझ से सीख ले कुछ ! मेरा भी कुछ काम बन जाएगा ! क्योंकि तेरी दीदी तो अब हाथ लगाने देती नहीं, तू ही कुछ मदद कर दे !
दीदी भी उन्हें प्रोत्साहित करते हुए कहती- हाँ हाँ ! इसे भी कुछ सिखा दो !
और जीजू मुझे अपनी बाँहों में लेकर भींच देते और यहाँ वहां छू भी लेते, मुझे भी यह सब अच्छा लगता था लेकिन ऊपरी मन से मैं जीजू दीदी की ऐसी बातों का विरोध करती थी। धीरे-धीरे जीजू की हरकतें बढ़ने लगी। अब तो वो दीदी के सामने ही मेरे होटों को चूम लेते और मेरे स्तन भी अच्छी तरह मसल देते थे।
इसी बीच होली आ गई। सभी उत्साहित थे होली खेलने के लिए। दीदी-जीजू की भी शादी के बाद पहली होली थी और मेरा रिश्ता भी अभी हुआ था। जीजू पहले ही दिन काफी सारे रंग, अबीर, गुलाल ले आए थे। होली वाले दिन मम्मी तो रसोई में भिन्न भिन्न पकवान बनाने में लग गई थी सुबह से ही। जीजू ने मुझे और माला को बाहर बगीचे में बुला लिया होली खेलने के लिए। मैंने सफ़ेद टॉप और पैरेलल पहना था, दीदी ने गुलाबी सलवार-सूट पहना और जीजू टी-शर्ट और नेकर में थे।
पहले जीजू में मुझे थोड़ा सा गुलाल लगाया मेरे गोरे गालों पर, फिर दीदी को भी गुलाल लगाया। दीदी ने भी रोहित के चेहरे पर गुलाल लगाया तो जीजू ने दीदी को चूम लिया उनके होटों पर। दीदी मेरी तरफ देख कर थोड़ा शरमाई तो जीजू ने कहा- अभी उसकी बारी भी आयेगी !
इतना कहते ही जीजू ने मुझे पकड़ लिया और मुझे चूमना शुरू कर दिया पहले होटों पर, गालों पर फिर कानों और गले पर।
इतने में जीजू ने अपने होंठ मेरे टॉप के ऊपर मेर स्तनों पर रख दिए। मैं कांप उठी। उनके होंठ कुछ खुले और मेरे चुचुक का उभार उनके होटों में दब गया। मेरी तो जैसे जान ही निकल गई। मैंने जीजू को हल्का सा धक्का देकर हटा दिया। दीदी सब देख रही थी और मुस्कुरा रही थी।
लेकिन जीजू कहाँ मुझे छोड़ने वाले थे! उन्होंने मुझे फिर पकड़ लिया इस बार उनके हाथ मेरे पृष्ठ उभारों पर थे और होंठ मेरे होंठों पर। मैंने उनकी पकड़ से छूटने का भरसक प्रयत्न किया मगर कहाँ मैं कोमल-कंचन-काया और कहाँ बलिष्ठ-सुडौल जीजू ! जीजू मुझे चूमते चूमते और मेरे चूतड़ों को सहलाते हुए धकेल कर बगीचे में एक पेड़ तक ले गए और उसके सहारे मुझे झुका कर बेतहाशा मुझ से लिपटने लगे, मुझे चूमने चाटने लगे, मुझे नोचने लगे। मेरे शरीर का कोई अंग उनके हाथों से अछूता नहीं रहा। उनके हाथ अब मेरे टॉप में जा चुके थे। चूँकि मैंने ब्रा नहीं पहनी थी तो मेरे नग्न स्तन उनके हाथों में आ गए और मैं सिहर उठी। दीदी खड़ी यह सारा खेल देख रही थी और हंस रही थी।
अब तो जीजू के हाथ मेरे चूतड़ों से फिसल कर आगे की ओर आ गए थे मेरे तन-मन में काम ज्वाला भड़कने लगी थी। अब मैं चाह कर भी जीजू का विरोध नहीं कर पा रही थी।
अब जीजू ने मुझे वहीं बगीचे में हरी घास पर लिटा लिया और मेरे टॉप को ऊपर उठा दिया। मेरा नग्न वक्ष-स्थल अब जीजू की आँखों के सामने था। उनके होंठ मेरे चुचूकों से खेलने लगे। दीदी दूर खड़ी यह सब देख कर मस्त हो रही थी कि तभी मेरी नज़र अमित पर पड़ी जो दूर से यह सब नजारा देख रहा था।
मै आपको बताना भूल गई कि अमित सुमित का छोटा भाई है यानि मेरे देवर, जो दिल्ली में एम बी ए कर रहा है। मुझे तनिक भी याद नहीं रहा था कि वो भी होली खेलने यहाँ आ सकता है।
अमित को देखते ही मेरे तो जैसे प्राण ही निकल गए। उसने मुझे देख लिया था जीजू के साथ इस हालत में ! मैं तो गई बस !
मैंने जीजू को अपने ऊपर से धक्का दे कर हटाया और जल्दी से टॉप ठीक किया। इसी बीच मेरी हड़बड़ी देख कर दीदी ने भी अमित को देख लिया था। दीदी आगे बढ़ी और अमित स्वागत करते हुए कहा- आओ अमित ! होली की शुभकामनाएँ !
अमित आगे बढ़ा और दीदी को थोड़ा गुलाल लगाते हुए बोला- आप सभी को भी होली की बहुत बहुत शुभकामनाएँ !
दीदी ने अमित को बगीचे में ही रखी कुर्सी पर बैठने को कहा। तब तक मैं भी वहाँ आ गई थी। जीजू भी मेरे साथ साथ ही थे। अमित ने मेरे जीजू को होली की बधाई दी और रंग लगाते हुए बोला- बहुत मस्ती हो रही है होली की ! अमित की नजरें मेरी तरफ थी।
मैंने अपने आप को संयत करके अमित को होली की शुभकामनाएँ देते हुए उसके चेहरे पर गुलाल लगाया।
अमित बोला- सिर्फ रंग से काम नहीं चलेगा ! मिठाई-विठाई खिलाओ !
इसी बीच दीदी अन्दर जा चुकी थी मम्मी को अमित के आने की सूचना देने और नाश्ते का प्रबंध करने !
मम्मी बाहर आई तो अमित ने उनको भी होली की मुबारकबाद दी। मम्मी ने सुमित और उनके मम्मी पापा के बारे में पूछा, कुछ देर बात करके मम्मी अंदर चली गई और दीदी ने हम सबको भी नाश्ते के लिए अंदर बुलाया।
जीजू आगे चल रहे थे, उनके पीछे मैं थी और मेरे पीछे अमित।
अचानक अमित ने मेरे पृष्ठ उभार पर चूंटी काटी, मैने चौंक कर पीछे देखा तो अमित ने अर्थपूर्ण नज़रों के साथ अपने होंठ गोल करते हुए मेरी तरफ एक चुम्बन उड़ा दिया। मेरे मन में हलचल होने लगी।
नाश्ते के बाद अमित बोला- अब थोड़ी होली हो जाए !
दीदी ने कहा- हाँ चलो ! बाहर बगीचे में ही चलते हैं !
हम चारों फिर बाहर आ गए। मम्मी रसोई में ही लगी रही। बाहर आते ही अमित ने मुझे पकड़ लिया, मेरे चेहरे और बालों में गुलाल भर दिया। दीदी-जीजाजी तो कुर्सियों पर बैठ गए।
मैंने भी अमित के हाथ से रंग का पैकेट छीन कर उसके सर पर उलट दिया।
तब अमित ने पूछा ही था कि पानी कहाँ है, उसकी नजर पौधों को पानी देने के लिए लगे नल और ट्यूब पर पड़ गई। उसने अपनी जेब से एक छोटी सी पुड़िया निकाली और इसे खोल कर मेरे बालों में डाल दिया और नल खोल कर ट्यूब से मेरे सर पर पानी की धार छोड़ दी।
मैं एकदम गुलाबी रंग से नहा गई। मेरे कपड़े मेरे बदन से चिपक गए और मेरे स्तन, चूचुक, चूतड़ सब उभर कर दिखने लगे।
तभी अमित ने अपनी एक बाजू से मेरी कमर पकड़ ली और दूसरे हाथ से पीले रंग का गुलाल निकाल कर पहले मेरे चेहरे पर लगाया और फिर मेरी पीठ की तरफ से मेरे टॉप को उठा कर मेरी कमर को पूरा रंग दिया।
दीदी-जीजू बैठे यह सब नज़ारा देख रहे थे।
अभी भी अमित का मन नहीं भरा था। वो मुझे दबोच कर उसी पेड़ के पास ले गया और उस पर मुझे झुका कर एक मुठ्ठी रंग मेरे पैरेलल में हाथ डाल कर मेरे चूतडों पर रगड़ दिया। इस पर मुझे बहुत गुस्सा आया जो मेरे चेहरे पर भी झलकने लगा।
अमित ने यह देख कर कहा- भाभी ! वो आपके जीजू क्या कर रहे थे आपके साथ? और मैं तो आपका प्यारा देवर हूँ। अगर साली आधी घर वाली होती है तो भाभी भी तो कुछ होती है।
उसने मुझे पेड़ के पीछे इस तरह कर लिया कि दीदी जीजू से ओट हो जाए। फिर उसने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए, लेकिन गुलाल लगे होने के कारण उसे कुछ मज़ा नहीं आया तो उसने मेरा टॉप आगे से उठा कर मेरे होंठ साफ़ किए और अपने होंठ मेरे स्तनों पर टॉप के ऊपर रगड़ दिए। फिर उसने जोरदार चूमाचाटी शुरू कर दी। मैं उससे छूटने का भरसक प्रयत्न कर रही थी।
अमित ने कहा- भाभी ! प्यार से प्यार करने दो ! मैंने सब देख लिया है कि कैसे आप अपने जीजू के साथ लगी हुई थी।
अब अमित के हाथ मेरे स्तनों पर जम चुके थे। वो उन्हें बुरी तरह मसल रहा था। मेरे मुंह से उई ! आ ! आहऽऽ ! की आवाजें आने लगी थी।
मेरी आवाज़ सुनकर दीदी बोली- नीतू ! क्या हुआ ! और उठ कर हमारी तरफ़ आने लगी।
दीदी की आवाज़ सुन कर अमित ने अपने हाथ मेरे टॉप में से निकाल कर मेरे चेहरे पर रख दिए।
दीदी ने पास आकर फ़िर पूछा- क्या हुआ नीतू?
इससे पहले मैं कुछ बोलती, अमित बोल पड़ा- कुछ नहीं दीदी ! भाभी की आँख में जरा उंगली लग गई है।
और हम तीनों जीजू के पास आकर बैठ गए और सामान्य बातचीत होने लगी। पर उन तीनों की नज़रें रह रह कर मेरी ओर उठ जाती थी, जैसे कुछ पूछ रही हों ! जीजू और दीदी की नज़रें जैसे पूछ रही थी कि अमित ने कुछ ज्यादा ही तो छेड़छाड़ नहीं की ! और अमित की नज़र पूछ रही थी- भाभी ! कुछ मज़ा आया?
बात करते करते अमित ने पूछा- भाभी ! आज शाम को क्या कर रही हो?
मैंने सामान्य ढंग से कह दिया- कुछ खास नहीं !
तो अमित ने कहा- कल सुमित भैया का फ़ोन आया था, कह रहे थे कि अपनी भाभी को मेरी तरफ़ से कोई उपहार दिलवा देना उसी की पसन्द का ! शाम को बाज़ार भी खुल जाएगा, आप तैयार रहना मैं चार बजे तक आपको लेने आ जाऊँगा बाज़ार ले जाने।
दीदी और मैं एक साथ ही बोल उठी- अरे ! इसकी क्या जरूरत है !
तो अमित बोला- जरूरत क्यों नहीं है? एक उपहार भैया की ओर से, एक मेरी ओर से ! और भाभी आप भी तो मुझे कोई उपहार देंगी, देंगी ना !
मैं उसकी तरफ़ ही देख रही थी और वो मेरी आँखों में झाँक कर पूछ रहा था। उसकी आँखों में शरारत साफ़ दिख रही थी।
आखिर मुझे हाँ करनी ही पड़ी।
थोड़ी देर और बातें करने के बाद अमित जाने के लिए उठ खड़ा हुआ और कहने लगा- भाभी एक बार गले तो मिल लो होली पर !
उसकी बात में प्रार्थना कम और आदेश ज्यादा झलक रहा था। मैं उठी और उसने मुझे अपनी बाहों में ले कर भींच लिया और दीदी-जीजू के सामने ही मेरे गालों को चूम लिया।
अब अमित जा चुका था। हम तीनों बगीचे में बैठे अभी कुछ देर पहले हुए सारे घटनाक्रम के बारे में सोच रहे थे। लेकिन कोई कुछ बोल नहीं रहा था।
दीदी ने चुप्पी तोड़ी- अमित ने बहुत गलत किया ! उसने आप दोनों को देख लिया था शायद ! इसीलिए उसकी इतनी हिम्मत हुई। उसने सुमित को या किसी को इस बारे में बता दिया तो?
नहीं ! वो किसी से नहीं कहेगा ! वो भी तो कुछ ज्यादा ही कर गया। अगर उसे किसी को बताना होता तो वो यह सब ना करता, जीजू ने कहा।
इस पर मैं फ़ूट पड़ी- जीजू ! वो ज्यादा कर गया या आप ही कुछ जरूरत से आगे बढ़ गए थे? और दीदी आप? आप भी कुछ नहीं बोली जीजू को मेरे साथ बदतमीजी करते हुए?
जीजू बोले- बदतमीजी? अरे तुम इस बदतमीजी कहती हो? ऐसी छोटी मोटी छेड़छाड़ ना हो तो साली-जीजा के रिश्ते का मज़ा ही क्या?
मैंने जीजाजी की बात का उत्तर देते हुए कहा- तो फ़िर अमित का भी क्या कसूर ! देवर भाभी का रिश्ता भी तो हंसी-मज़ाक, छेड़छाड़ का ही होता है !
दीदी माहौल गर्म होते देख बोली- चलो छोड़ो इस बात को ! चलो ! नहा-धो लो ! फ़िर शाम को बाज़ार भी जाना है।
फ़िर हम सब नहा लिए और खाना खा कर आराम करने लगे। थोड़ी देर बाद दीदी ने चाय के लिए पूछा और वो चाय बनाने चली गई तो जीजू की फ़िर जुबान खुली- वैसे नीतू ! आज मज़ा आ गया तुम्हारी चूचियाँ चूस कर ! तुम्हें भी तो कम मज़ा नहीं आया होगा?
मैं भड़क गई- जीजू अब बस भी करो ! बहुत हो चुका !
बहुत क्या हो चुका? अभी तो लगभग सब कुछ ही बाकी है, अभी तो कुछ भी नहीं हुआ !
अच्छा तो जो बाकी रह गया है वो भी कर लो ! लो आपके सामने पड़ी हूँ ! कर लो अपने दिल की ! कहते हुए मैं जीजू के बराबर में आ गई।
जीजू ने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोले- तुम तो गुस्सा होने लगी।
इतना कहते हुए जीजू ने मेरा हाथ सहलाना शुरू कर दिया और मुझे मनाने लगे। हाथ सहलाते सहलाते जीजू मेरे कन्धे तक पहुँच गए और अब मेरे कंधे और गर्दन पर हाथ फ़िरा रहे थे। उसके बाद मेरी और से कोई आपत्ति ना देख फ़िर उन्होंने मुझे अपनी बाहों में दबोच कर मेरे होंठों को चूमते हुए कहा- मेरी अच्छी नीतू !
इतने में दीदी चाय लेकर आ गई। मैंने दीदी से कहा- मम्मी को भी यहीं बुला लो !
तो दीदी ने बताया कि मम्मी सो रही हैं।
शाम को साढ़े तीन बजे अमित का फ़ोन आया, कहने लगा- भाभी ! तैयार रहना, मैं थोड़ी देर में आ रहा हूँ आपको लेने।
कहानी का अगला और अंतिम भाग कुछ दिन बाद...

मेरे जीजू और देवर ने खेली होली-2

लेखिका : फुलवा
शाम को साढ़े तीन बजे अमित का फ़ोन आया, कहने लगा- भाभी ! तैयार रहना, मैं थोड़ी देर में आ रहा हूँ आपको लेने।
मैंने उसे कहा- दीदी और जीजू भी चलेंगे हमारे साथ, तुम एक घण्टे से पहले मत आना क्योंकि इतना समय तो लग ही जाएगा तैयार होने में!
इस पर अमित बोला- नहीं ! आप अकेले ही आएँगी मेरे साथ !
मेरे मन में शंका हुई, कहीं फ़िर कोई शरारत या कुछ और तो नहीं सोच रहा है अमित ! मुझे डर भी लग रहा था क्योंकि अमित ने मुझे जीजू के साथ देख लिया था। अगर उसने कुछ बता दिया अपने घर में या सुमित को तो क्या होगा !
फ़िर मैंने आग्रह किया कि सब इकट्ठे ही चलेंगे बाज़ार ! तो वो नहीं माना और मुझे बताया कि उसके पास मुझे दिखाने के लिए कुछ है।
पर मेरे बार बार पूछने पर भी उसने बताया नहीं कि क्या है और मुझे तैयार कर ही लिया अकेले चलने के लिए। दीदी, जीजू का तो वैसे भी कोई कार्यक्रम था ही नहीं जाने का।
अमित आया और हम दोनों गाड़ी में चलने लगे तो दीदी ने अमित से कहा- ज्यादा देर मत करना, दो घण्टे तक तो आ ही जाओगे?
इससे पहले मैं कुछ बोलती, अमित ने कहा- हाँ दीदी ! कोशिश करेंगे, पर देर भी हो सकती है।
और हम चल दिए। थोड़ा ही आगे गए थे कि अमित ने मेरे बाएँ कंधे पर हाथ रख कर मुझे अपनी ओर खींच लिया और मेरे गाल पर एक चुम्मा ले लिया।
मुझे बहुत बुरा लगा- यह क्या कर रहे हो अमित !
प्यार से एक चुम्मी ली है भाभी ! अच्छा बताओ कहाँ चलोगी?
तुम बताओ? कौन सी मार्केट आज खुली होगी?
अरे मार्केट का तो बाद में देखेंगे। कुछ मौज-मस्ती हो जाए ! वैसे भी गिफ़्ट तो पहले से ही है मेरे पास आपके लिए !
क्या है?
उसने अपना मोबाइल निकाला और कुछ बटन दबाए और मेरे हाथ में दे दिया।
देखो भाभी ! आपके लिए !
मैंने देखा कि उसमें जीजू और मेरा होली का छेड़छाड़ की वीडियो थी। मैं तो सन्न रह गई। लगभग तीन मिनट की वीडियो होगी वह।
क्यों भाभी ? कैसी लगी मूवी?
मेरे मुँह में जैसे बोल ही नहीं रहा था। मैंने अमित की ओर देखा तो वो मुझे ही देख रहा था और हमारी नज़रें मिलते ही उसने मुझे फ़िर अपनी ओर खींच कर मेरे होंठ चूम लिए और उसका एक हाथ मेरी जांघ पर आ गया। मैंने जींस पहनी हुई थी। वो एक हाथ से गाड़ी सम्भाल रहा था और दूसरे हाथ से मेरी जांघ। मैंने उसका हाथ हटाने की कोशिश की तो बोला- भाभी किसी होटल में कमरा ले लेते हैं।
मेरी समझ में सब आ चुका था। अमित मुझे ब्लैकमेल कर रहा था और इस वीडियो का फ़ायदा उठाना चाह रहा था। मैं फ़ंस चुकी थी। किसी तरह से हिम्मत जुटा कर मैंने अमित से कहा- प्लीज़ अमित ! इस वीडियो को डीलीट कर दो !
अरे भाभी ! इसमें ऐसा क्या है जो तुम डर रही हो। मुझे तुम्हारा और तुम्हारे जीजू का खेल अच्छा लगा तो रिकॉर्ड कर लिया, बस !
चलो अब किसी होटल में जाकर हम भी ऐसे ही कुछ खेलते हैं !
अमित ! क्या कह रहे हो? मैं तुम्हारी होने वाली भाभी हूँ ! तुम्हें शर्म आनी चाहिए !
भाभी ! जब आपको शर्म नहीं तो मुझे काहे की शर्म? आप तो अपने जीजू के साथ खूब मौज-मस्ती कर रही थी ! खूब ऐश की होगी जीजू से अपने? पहली बार का मज़ा अपने जीजू को दिया या किसी यार से लुटवा ली अपनी जवानी?
अमित ! तुम्हें पता है कि तुम क्या बके जा रहे हो? गाड़ी रोको ! मुझे नहीं जाना तुम्हारे साथ कहीं भी !
नीतू डीयर ! अब तुम अपनी मर्ज़ी से नहीं मेरी मर्ज़ी पर चलोगी।
अमित आप से तुम पर उतर आया था।
बता ना ! किससे अपनी चूत का उदघाटन करवाया?
मैंने यह सुन कर अपना चेहरा दोनों हाथों से छुपा लिया और मेरे आँसू छलक पड़े। मैं सुबक पड़ी। इतनी अश्लील भाषा तो मैंने कभी सुनी ही नहीं थी।
अमित ने खाली सड़क देख गाड़ी एक तरफ़ लगाई और मेरे दोनों हाथ अपने दोनों हाथों में ले कर मुझे अपनी तरफ़ खींचा और मेरे गालों पर से मेरे आँसू अपनी जीभ से चाट लिए। मैंने पीछे हटने की कोशिश की मगर अमित ने और मज़बूती से मुझे पकड़ कर अपने ऊपर गिरा सा लिया और कहा- ज्यादा नखरे मत कर ! अगर ना-नुकर की तो अभी यह वीडियो सुमित को भेज दूंगा।
इतना कह कर अमित ने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए और चूमते चूमते मेरे होंठ ऐसे चूसने लगा जैसे कोई फ़ल खा रहा हो। अब तक उसका एक हाथ मेरे शर्ट में जाकर मेरे स्तनों से खेलने लगा। मैं रोने लगी थी। पर मैंने अपने आप को अमित के हवाले कर दिया। मेरा विरोध ढीला पड़ते देख अमित ने भी थोड़ी नरमी दिखाई और मुझे छोड़ दिया और मेरा एक हाथ पकड़ कर अपने लौड़े पर पैन्ट के ऊपर ही रख लिया। मैंने फ़िर अपना हाथ पीछे खींच लिया। अब अमित कुछ नहीं बोला और गाड़ी स्टार्ट करके आगे बढ़ा दी।
थोड़ा चलने के बाद अमित बोला- नीतू ! तुम इतने नखरे क्यों दिखा रही हो। तुम्हारे जीजा को तुम्हारे साथ देख कर मैं तो समझा था कि तुम आसानी से मान जाओगी, तुम तो ऐसे नखरे दिखा रही हो जैसे कोई कुँवारी कन्या हो।
मुझे डर भी लग रहा था और गुस्सा भी आ रहा था। मेरे मुंह से गुस्से में निकल गया- तुमने क्या मुझे कोई चालू लड़की समझ लिया है?
मैं अभी तक तुम्हारी हरकतें सह रही हूँ सिर्फ़ इस वीडियो के कारण ! जीजा-साली और देवर-भाभी के रिश्ते में यह सब थोड़ा बहुत चलता ही है और तुमने इसका गलत मतलब निकाला। ये रिश्ते बने ही इस तरह से हैं कि साली अपने जीजा से और देवर अपनी भाभी से हंसी मज़ाक में ही काफ़ी कुछ सीख सके। इसका मतलब यह नहीं कि वो सीमा ही लांघ जाएँ ! मैं मानती हूँ कि जो तुमने आज मेरे जीजाजी को मेरे साथ होली खेलते देखा वो इन पवित्र रिश्तों की सीमा का सरासर उल्लंघन था, पर जो तुमने किया उसमें क्या तुमने अपनी मर्यादा का ध्यान रखा?
अरे ! साली को तो आधी घरवाली कहा भी जाता है लेकिन हमारे हिन्दू समाज़ में भाभी को तो माँ तक का दर्ज़ा दिया गया है। भाभी तो एक ऐसी माँ की तरह होती है जिससे आप वो बात भी कर सकते हो जो अपनी माँ से कहते हुए हिचकते हो। भाभी तो एक माँ और एक दोस्त का मिलाजुला रूप है।
इसी प्रकार मैं ना जाने क्या क्या बोल गई अमित के सामने और वो चुपचाप सामने सड़क पर नज़र गड़ाए मेरी बात सुनता रहा और गाड़ी चलाता रहा। उसकी आँखों की नमी मैं देख पा रही थी।
अचानक उसने खाली सड़क देख कर गाड़ी रोकी और झुक कर मेरे पैरों की तरफ़ हाथ बढ़ाते हुए बोला- भाभी ! मुझे माफ़ कर दो ! जब मैंने आपको होली खेलते देखा तो पहले तो मुझे भी बहुत गुस्सा आया आपको उस हालत में देख कर, फ़िर मैंने सोचा कि चलो मैं भी बहती गंगा में हाथ धो लूँ ! मगर आप तो गंगा की तरह निकली जो अपने में मेरे और आपके जीजू जैसी गंदगी समेट कर भी पवित्र बनी हुई है।
यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !
नहीं अमित ! तुमने तो मुझे देवी बना दिया, काफ़ी हद तक गलती मेरी भी थी, मुझे जीजू को उसी समय रोकना चाहिए था जब वो अपनी हद पार करने लगे थे। मैं भी एक इन्सान हूँ, एक लड़की हूँ, उस वक्त मेरी अन्तर्वासना भी कुछ हद तक जागृत हो गई थी, इसी कारण मैं चाह कर भी जीजू और फ़िर तुम्हें वो सब करने से रोक नहीं पाई जो नहीं होना चाहिए था।
लेकिन जब तुमने मेरे साथ जबरदस्ती करने की और मुझे ब्लैक-मेल करने की कोशिश की तो मैं अपनी वासना से जागी।
मैं बोलती जा रही थी और अमित की आँखों से आँसू टप-टप गिर रहे थे। आत्म-ग्लानि उसे खाए जा रही थी। मैंने उसे इस तरह रोते देखा तो मेरा मन उसकी ओर से साफ़ हो गया और मैंने अपने दोनों हाथों से उसके आँसू पौंछते हुए उसे कहा- अब जो हो चुका उसे भूल जाओ और चलो बाज़ार, मुझे अपना उपहार भी तो लेना है !
इतना सुनते ही अमित बिलख उठा और उसने मेरी गोद में अपना सिर रख दिया। उसके मुँह से बार बार यही शब्द निकल रहे थे- भाभी, मुझे माफ़ कर दो भाभी, मुझे माफ़ कर दो !
मेरी आँखें भी गंगा-जमना की तरह बह रही थी। मैंने उसका सर ऊपर किया और अपने गले से लगा लिया।

This page was last updated on 22 Oct 2014