प्रेषक : नीरज गुप्ता – उस्ताद जी
राज जयपुर आने के बाद चाची से लगातार बातें करता रहता था. बहुत गरम बातें होती थी. एक दिन राज ने, जब उसके कोई आने वाला नही था, चाची को ख़ुद के घर आने का निमंत्रण दिया, जो चाची ने सहर्ष स्वीकार कर लिया. राज ने उसको बोला कि तुम मेरा बलात्कार करोगी या मैं तुम्हारा तो चाची ने बोला कि ये तो वक्त बताएगा.
अगले दिन चाची दोपहर में ३ बजे राज के यहाँ पहुच गई, एकदम टाइट पजामा और ऊपर कुरता. कमरे के अन्दर आते ही दोनों एक दूसरे की बाँहों में बंध गए। दोनों के होंट एक दूसरे के साथ चिपक गए और बहुत लंबा किस का एक दौर चला। चाची के हाथ राज कि कमीज के अन्दर पूरे शरीर पर चल रहे थे, चल क्या रहे थे यो कहें कि चाची उत्तेजना में राज को खरोंच रही थी. बड़ी मुश्किल से दोनों थोडी देर के लिए अलग हुए तो राज ने बोला कि ये पजामा इतना टाइट है उतरेगा कैसे तो चाची ने ख़ुद उतार दिया. ज़रा सी देर में ही एक दूसरे को कपडों से अलग कर दिया. अब चाची ने राज के शरीर का कोई हिस्सा नही छोड़ा जहाँ किस नही किया हो.
उत्तेजना के मारे चाची का हाल बुरा था. वो घरेलू औरत राज के लंड तक को चूस गई. राज की पीठ और सीने पर चाची की उँगलियों की खरोंच छप गई. आख़िर कई बरसों में शादी के बाद उसकी चुदाई की इच्छा जोरदार ढंग से पूरी हो रही थी. राज ने भी चाची को खूब चूमा, जीभ चूसी, बोबे चूसे, खूब दबाए, चूत को लंड से रगडा.
चाची की चूत बुरी तरह से गीली हो चुकी थी. चाची ने राज को ऊपर आने को बोला और बेड पर सीधी लेट गई. राज चाची की दोनों टांगो को चौडा कर के बीच में बैठ गया और अपने लंड को चाची की चूत पे लगा के अपना लंड चाची की चूत में गहरे उतार दिया. चाची के मुह से एक लम्बी सीत्कार निकली. होंट एक दूसरे के साथ चिपक गए. दोनों ने एक दूसरे को चूसना शुरू कर दिया. राज के दोनों हाथों में चाची के दोनों बोबे थे जिनको वो खूब दबा रहा था. लंड धीरे धीरे अन्दर बाहर हो रहा था।
धीरे धीरे चाची की गांड हिलने लगी, वो नीचे से धक्के मारने …………….
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