Posts Tagged ‘अन्तर्वासना’
Thursday, November 12th, 2009
मेरे प्रिय मित्रो !
आज आप सभी के सहयोग से अन्तर्वासना हिन्दी कथाओं के लिए एक अत्यधिक लोकप्रिय साईट बन गई है। इस कार्य में विशेष योगदान कथा-लेखकों, लेखिकाओं का है जो परिश्रम करके कहानी को लिखते हैं और फ़िर धैर्य से उसके प्रकाशित होने की प्रतीक्षा करते हैं।
मुझे अधिकाधिक पत्र ऐसे प्राप्त होते हैं जिनमें हमारे पाठक कहानियों के अलावा चित्र, चलचित्र और अन्य मनोरजक सामग्री की मांग करते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए अन्तर्वासना ने एक आपके लिए आपकी अपनी भाषा हिन्दी में एक फ़ोरम आरम्भ किया है जिसमें आप अपने चित्र, चलचित्र, चुटकले, समाचार, बातचीत, गपशप आपस में बाँट सकते हैं, किसी भी विषय पर अपने विचार लिख सकते हैं, आलोचना, प्रशंसा, प्रतिक्रिया दे सकते हैं।
मेरे विचार में अधिकतर पाठक जानते होंगे कि फ़ोरम में भाग कैसे लिया जाता है। सभी से अनुरोध है कि अन्तर्वासना-फ़ोरम के सदस्य बन कर आनन्द उठाएँ !
अन्तर्वासना-फ़ोरम यहाँ है !
धन्यवाद !
Tags: अन्तर्वासना, अन्तर्वासना-फ़ोरम, हिन्दी सेक्स फ़ोरम
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Sunday, November 9th, 2008
उन्होंने अपना ब्लाउज खोल दिया। मै उनके बूब्स देख कर दंग रह गया।वो इतने बड़े थे कि ब्रा से भी बाहर झांक रहे थे। उन्होंने मुझे बाथरूम में पानी लाने को कहा और खुद बाथरूम में चली गयी।
जैसे ही मै बाथरूम में पानी लेकर गया तो मैने देखा कि चाची पूरी नंगी खड़ी हैं। यह देख कर मेरा लंड चडडी फ़ाड़ कर बाहर आने लगा। चाची ने मेरी चडडी में हाथ डाला और बोली कि गौरव तेरा घोड़ा तो ताव में आ गया है। अब तो मुझे चोद कर रहेगा, पर आज नहीं कल्। कल सब शादी में जायेंगे तब चोद लेना। यह कह कर चाची ने मुझे बाथरूम से बाहर जाने को कहा। जब घर से सब लोग अगले दिन बाहर गये तो मैने दरवाजे बन्द करते ही चाची को पकड़ कर उनके होंठ पर किस करने लगा। उसके बाद मैने चाची को जम कर चोदा।
मुझसे चुदवाते समय चाची बोली कि कल तुझे अपनी बहन से मिलवाउंगी। अगले दिन चाची ने अपनी बहन को बुला लिया और हमारा परिचय करवाया। उसके बाद मै उसे बाहर ले जाने लगा तो चाची मुझ से बोली कि इसको खाने का बहुत शौक है, धयान रखना। मै उसे एक अच्छे होटल में ले गया। मैने उसे ओर्डर करने को कहा तो उसने दो कोल्ड कोफ़ी ओर्डर की। मैने कहा-जान! खने के लिये भी कुछ ओर्डर करो तो वो मेरे लंड पर हाथ रख कर बोली कि मुझे तो ये खाना है तो मै उसे कमरे में ले गया और अपना ८” लम्बा लड उसके मुंह में दे दिया। वो बहुत मजे से उसे चूस रही थी। तभी मैने उसके ब्रा में हाथ डाला और उसके बूब्स को आजाद कर दिया। फ़िर मैने उसकी पैन्टी…….
पूरी कहानी यहां है
Tags: अन्तर्वासना, उसकी बहन, कहानी, चाची, वासना, हिन्दी
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Saturday, November 8th, 2008
प्रेषक : नीरज गुप्ता – उस्ताद जी
राज जयपुर आने के बाद चाची से लगातार बातें करता रहता था. बहुत गरम बातें होती थी. एक दिन राज ने, जब उसके कोई आने वाला नही था, चाची को ख़ुद के घर आने का निमंत्रण दिया, जो चाची ने सहर्ष स्वीकार कर लिया. राज ने उसको बोला कि तुम मेरा बलात्कार करोगी या मैं तुम्हारा तो चाची ने बोला कि ये तो वक्त बताएगा.
अगले दिन चाची दोपहर में ३ बजे राज के यहाँ पहुच गई, एकदम टाइट पजामा और ऊपर कुरता. कमरे के अन्दर आते ही दोनों एक दूसरे की बाँहों में बंध गए। दोनों के होंट एक दूसरे के साथ चिपक गए और बहुत लंबा किस का एक दौर चला। चाची के हाथ राज कि कमीज के अन्दर पूरे शरीर पर चल रहे थे, चल क्या रहे थे यो कहें कि चाची उत्तेजना में राज को खरोंच रही थी. बड़ी मुश्किल से दोनों थोडी देर के लिए अलग हुए तो राज ने बोला कि ये पजामा इतना टाइट है उतरेगा कैसे तो चाची ने ख़ुद उतार दिया. ज़रा सी देर में ही एक दूसरे को कपडों से अलग कर दिया. अब चाची ने राज के शरीर का कोई हिस्सा नही छोड़ा जहाँ किस नही किया हो.
उत्तेजना के मारे चाची का हाल बुरा था. वो घरेलू औरत राज के लंड तक को चूस गई. राज की पीठ और सीने पर चाची की उँगलियों की खरोंच छप गई. आख़िर कई बरसों में शादी के बाद उसकी चुदाई की इच्छा जोरदार ढंग से पूरी हो रही थी. राज ने भी चाची को खूब चूमा, जीभ चूसी, बोबे चूसे, खूब दबाए, चूत को लंड से रगडा.
चाची की चूत बुरी तरह से गीली हो चुकी थी. चाची ने राज को ऊपर आने को बोला और बेड पर सीधी लेट गई. राज चाची की दोनों टांगो को चौडा कर के बीच में बैठ गया और अपने लंड को चाची की चूत पे लगा के अपना लंड चाची की चूत में गहरे उतार दिया. चाची के मुह से एक लम्बी सीत्कार निकली. होंट एक दूसरे के साथ चिपक गए. दोनों ने एक दूसरे को चूसना शुरू कर दिया. राज के दोनों हाथों में चाची के दोनों बोबे थे जिनको वो खूब दबा रहा था. लंड धीरे धीरे अन्दर बाहर हो रहा था।
धीरे धीरे चाची की गांड हिलने लगी, वो नीचे से धक्के मारने …………….
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Thursday, November 6th, 2008
प्रेषक : संदीप
मैंने कहा – मैं तुम्हारे साथ कुछ भी नहीं करूँगा अगर तुम मुझ से प्यार नहीं करतीं तो!
उसने कुछ नहीं कहा और मैं समझ गया था . मैंने उसे लेट जाने को कहा और कहा मैं तुम्हारे साथ करना चाहता हूँ
फिर उसने कहा कि तो करो न …
मैंने कहा कि ले मेरी जान !
मैंने उसका टॉप के ऊपर उसके 2 रसगुल्ले जैसे बूब्स दबाने शुरू किए और वोह सिसकियां लेने लगी।
फिर क्या था मैंने अपना हाथ उसकी ब्रा में डाल दिया। क्या मजा था यारो ! मानो- या – ना -मानो ! बहुत ही अच्छा लगा।
मैंने पहली बार बूब्स का स्वाद जो लिया था न
मैंने कहा तुम मेरे सारे कपड़े उतार दो।
वो हँसी और बोली पहले मेरे तो उतार दो।
मैंने कहा लो मेरी जान . और मैंने उसे नंगी कर दिया उस बिना झांट वाली चूत क्या लग रही थी।……
पूरी कहानी यहां है
Tags: अन्तर्वासना, कहानी, काम वाली की चूत, वासना, हिन्दी
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Wednesday, November 5th, 2008
मैं दूसरे दिन छोटी स्कर्ट पहन कर और अन्दर एक छोटी सी पेंटी पहन कर बड़ी तैयारी के साथ इंतज़ार करने लगी. पेंटी इतनी छोटी थी कि झुकने पर पूरी चूतड दिख जाती थी. टॉप ढीला सा ..जो ऐसा था कि आधे बूब्स तो जरा सी कोशिश करने से ही नज़र आ जाते थे. मुझे लगा राजू के लिए इतना बहुत था.
राजू सर ८.३० पर आ गए. मेरे पापा ने उन से बात की …..फिर मुझे बैठक मैं बुला लिया.
पापा मम्मी ऑफिस की तैयारी करने लगे. राजू ने मुझे देखा तो वो देखता ही रह गया.
उसे घूरते देख कर मैं मन ही मन मुस्करा उठी. तीर निशाने पर लगा था.
मैंने कहा – “सर , आज कहाँ से शुरू करें …”
“हाँ हाँ बैठो ..पहले बुक्स ले आओ ..”
“मैं बुक लेकर आयी और सर के सामने उसे गिरा दिया. फिर उसे उठाने के लिए मैंने चूतड राजू की तरफ़ कर दिए और झुक गयी. मेरी गांड की दोनों गोलाईयां और छोटी सी पैंटी उसे दिखने लगी होगी. मैंने उसे तिरछी नज़र से देखा …तो मेरे चूतड की तरफ़ ही देख रहा था ….. उसे पसीना आ गया था … मेरा दिल भी ये सोच कर धड़कने लगा कि उसने पूरा देख लिया है. मैंने टेबल पर किताब रख दी.
मेरी नज़र उसकी पेंट पर चली गयी , जहाँ उसका लंड खड़ा हो रहा था…..
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Tuesday, November 4th, 2008
प्रेषक : राज अवस्थी
नाश्ता करने के बाद हम सभी बेड पर बैठ कर बातें करने लगे. फ़िर मनु और सन्नी ने अपनी चुदाई की कहानी चालू की. कैसे मनु ने सीमा को चोदा और कैसे सन्नी ने नीतू को. इसे सुनकर हम सभी धीरे-धीरे उत्तेजित हो रहे थे. मनु ने कहा कि तुम और सन्नी मिलकर पहले नीतू को चोदों मैं और सीमा बैठकर देखेंगे. मेरी बहुत दिन से इच्छा है कि नीतू को दो लोग मिलकर मेरे सामने चोदे. नीतू ने उस समय साडी पहनी थी. मनु सीमा के साथ बेड से उठकर सोफे पर चले गए.
मैंने नीतू का हाथ पकड़ कर खड़ा किया और उसके पीछे जाकर लो कट ब्लोउज से निकली हुई नंगी पीठ को चूमने लगा. उसकी ऊंचाई मुझसे थोडी ही कम थी. उसके साथ उसकी दोनों चूचियों को भी हाथ से पकड़ कर दबाने लगा. क्या चूची थी ! एक दम कठोर. फ़िर सामने से सन्नी आकर उसके होठों को चूसने लगा. फ़िर मैंने नीतू का मुंह थोड़ा सा तिरछा कर उसके होठों को चूसने लगा सन्नी उस समय उसकी चूचियां दबा रहा था फ़िर मैंने एक हाथ नीचे ले जाकर उसके बड़ी गांड को ऊपर से सहलाने लगा.
इस बीच मनु उठकर आया और नीतू की साडी उतार दी और कहा कि जल्दी से चोदों इसको. फ़िर वो वापस चला गया सीमा के पास. सीमा के भी कुछ कपडे उतर गए थे. लेकिन हम लोगों के पास उधर देखने कि फुर्सत नहीं थी. फ़िर मैंने नीतू के ब्लोउज के हुक खोलकर उतार दिया. …
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Friday, October 31st, 2008
प्रेषक : मो.शाहिद आलम
फिर मेरे मन में एक शरारत सूझी, मैंने उठकर एक सेक्सी फ़िल्म लगा दी| जिसमे एक सुहागरात का सीन आ रहा था| वह पेट के बल लेट कर फ़िल्म देखने लगी| जिससे उसकी चुचियां बेड पर दब रही थी| फिर मुझे ऐसा महसूस हुआ की फ़िल्म देखकर उसे भी कुछ हो रहा था| अचानक मुझसे पूछ लिया कि तुमने ये सब किया है कभी|
मैं अनजान बन कर पूछ- क्या ?
उसने कहा – यही जो इस वक्त टीवी में दिखा रहा है| मैंने कहा नही जो की सही था| मैंने पूछा क्या तुमने ?
वह शरमाते हुए बोली नही|
फिर मैं थोड़ा हिम्मत करके बोला- चलो आज हम दोनो ट्राई करते हैं| यह सुनकर वह उठ कर बैठ गई और बोली मैं तो ऐसे ही कह रही थी| नही यह सब ठीक नही है|
मैंने कहा – तो सीखेंगे कब ?
वह बोली – नही इसमे बहुत दर्द होता है|……
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Thursday, October 30th, 2008
लंड महाराज आज अपनी पूरी जवानी में तने खड़े थे लग रहा था कि सूट फाड़ कर अभी बाहर आ जायेंगे. इच्छा तो बहुत हो रही थी कि इस जनवरी की ठण्ड में घर से सात किलोमीटर दूर कहीं सुनसान में रोक कर चोद चाद दूँ. साला लंड फेरे में हाथ पकड़ते ही कंट्रोल से बाहर था. लेकिन अपने को ये सोचकर कंट्रोल किया की माल अपना है और जरा देर बाद घर पहुँचते ही मेरा ही होने वाला है. साडे ग्यारह बजे घर पहुंचे तो चाचाजी के बेटे, मेरे बड़े भाई की पत्नी मेरी भाभी ने रस्म निभाई की ये मेरी देवरानी आज तुम्हारे साथ सोएगी. दिल उछल कर गले में आ गया. कमरे में आकर एक दूसरे की ओर पीठ करके हमने कपड़े बदले. कंडोम का पैकेट मेरे दोस्त ने पहले ही इंतजाम कर दिया था.
पत्नी ने जेवर भी उतारे और मैंने सजे धजे पलंग पर पत्नी को बिठाया. कमरे में पन्द्रह वाट का बल्ब जल रहा था. कैमरे से चार छः फोटो लिए और उसकी बगल में बैठ गया. फोन पर ढेरो बात करने वाली मेरी पत्नी के जबान पर ताला लग गया और वो नीची नजर किए बैठी थी, उसके होंट सूख रहे थे. मैंने इधर उधर की दो चार बातें करने के बाद कहा कि किस करूँ तो उसने नजरें नीचे किए धीरे से गर्दन हिला दी. लंड बैठने का नाम नही ले रहा था. मैंने उसके गाल पर किस किया जो मेरी जिन्दगी का किसी जवान लड़की का पहला किस था. फ़िर मैंने उसको बोला किस करने को तो उसने भी मेरे गाल पर धीरे से किस किया अब मैंने उसके बूब्स पर हाथ रखा, वो सिहर गई लेकिन हाथ नही हटाया. अब धीरे धीरे मैंने बूब्स दबाना शुरू कि……….
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Wednesday, October 29th, 2008
ट्रेन अपनी पूरी रफ्तार पर दौडी जा रही थी. मुझे ठण्ड भी लग रही थी तभी मीनू की मम्मी ने कम्बल निकालना शुरू किया तो मीनू ने पहली बार बोला. रुको मम्मी मै अपना कम्बल दे देती हूँ और मै वो वाला ओढ लूंगी. मीनू ने अपना कम्बल और बिछा हुआ चादर दोनों दे दी….. मुझे बिन मांगे मुराद मिल गई क्योंकि मीनू के शरीर की खुशबू उस कम्बल और चादर मैं समां चुकी थी. मै फटाफट वो कम्बल लेकर अपनी सीट पर आ गया
… मुझे नींद तो आने वाली नहीं थी आँखों मैं मीनू की मुनिया और उसका चेहरा घूम रहा था. मै मीनू के कम्बल और चादर को सूंघ रहा था उसमे से काफी अच्छी सुंगंध आ रही थी. मैं मीनू का बदन अपने शरीर से लिपटा हुआ महसूस करने लगा और उसकी कल्पनों मैं खोने लगा.. मीनू और मै एक ही कम्बल मै नंगे लेटे हुए है मै मीनू के बूब्स चूस रहा हूँ और वो मेरे मस्त लौडे को खिला रही है. मेरा लंड मै जवानी आने लगी थी………..
हाय राम… ममम म इतना बड़ा और मोटा……….तो मैंने कभी किसी का नही देखा
मैंने पूछा “किसका देखा है तुमने… बताओ ”
मेरे भैया जब भाभी की चुदाई करते है तो मै अपने कमरे से झाँक कर देखती हूँ.. भाभी भइया के इससे अद्धे से भी कम साइज़ के पेशाब में चिल्लाती है फ़िर इस जैसी पेशाब मै तो मेरा क्या हाल करेगी… मै कभी नही घुसवाउंगी”
मैंने कहा अछा “मत घुसवाना, पर अभी तो इसको शांत करो”
“मै कैसे शांत करू” मीनू ने कहा
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Monday, October 27th, 2008
प्रेषिका : अनामिका शंकर
मैं : अब तुम भी तो कुछ बोलो
हाट विक्रम : ओके फिर तुम ठीक है
हाट विक्रम : अब मै तुम्हरे टॉवेल को निकालने लगता हूँ
हाट विक्रम : जबाब देती रहना
मैं : हाँ
हाट विक्रम : क्या करोगी बताते रहना
हाट विक्रम : तुम उस समय जब मै ऐसा करता हूँ
हाट विक्रम : समझी
मैं : मैं मन करती हूँ लेकिन मुझे मज़ा आने लगता है
हाट विक्रम : हाँ सही है
हाट विक्रम : अब तुम ब्रा और पैंटी में आ जाती हो केवल
मैं : तुम मेरा टॉवेल हटा के मेरे बूब्स दबाने लगते
हाट विक्रम : चच्ची है य
हाट विक्रम : फिर से बोलो तुम
मैं : चूची दबाने लगते हो
मैं : विक्रम मैं बहुत गरम हो रही हूँ ………
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