प्रेषक : सुनील
हम दोनों काफ़ी घुले मिले हुए थे। इसी लिए हम एक दूसरे की सभी बातें जानते थे। मैं उसके स्तनों और चूतड़ों को देख कर अपने लण्ड से खूब पानी निकालता था और उसके करीब जाने की कोशिश करता था, बार बार उसके बूब्स से टकराता था । वो भी यह बात समझ चुकी थी इसलिए मुझे भी किसी मौके की तलाश थी और एक दिन मुझे मौका मिल गया।
मेरी मौसी ने कहा कि वो सब चार पाँच दिन के लिए बाहर जा रहे हैं लेकिन पारुल की परीक्षा है, इसलिए वो अकेली है, तुम रात को उसके पास सो जाना !
मैं मन ही मन बहुत खुश हुआ और उसके घर पर ठीक दस बजे पहुँच गया। उसने लम्बी स्कर्ट और टॉप पहन रखा था। पहले हमने बहुत सारी बातें की फ़िर मैं उसके करीब आ गया। हम सोफ़े पर बैठे थे। मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और धीरे धीरे उसके साथ मस्ती करने लगा।
तभी वो मेरे गले से लग गई। जैसे ही मैंने उसे पकड़ा, वो अपने आप को छुड़ाने लगी लेकिन मैंने उसे कस कर पकड़ लिया। क्योंकि मैं यह मौका नहीं खोना चाहता था। मैं उसके गले पर चूमने लगा। अब वो भी मुझ से चिपक गई।
फ़िर मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए और एक हाथ से उसके बूब्स दबाने लगा। वो कहने लगी- रोमिल ! कुछ हो गया तो?
मैंने कहा- तुम डरो मत ! मैं पूरे इन्तज़ाम के साथ…
पूरी कहानी यहाँ है !
