लेखिका : नेहा वर्मा
“आंटी….आप मुझे मुझे बहुत प्यार करती है ना….!”
” हां बेटा …. तू मुझे बहुत प्यारा है….” कह कर उन्होने मुझे चूम लिया। मुझे ये साफ़ अहसास हो रहा था कि आंटी ने ना तो ब्रा पहन रखी थी और ना ही पेंटी। उनके शरीर के स्पर्श से साफ़ मालूम हो रहा था।
“आंटी मैं भी आपको प्यार कर लूँ….?”
“हां ….हां …. जरूर….!”
मैंने उनके गालों पर चुम्मा ले लिया…. मौका देखा ….आंटी की आंखे बंद थी…. मैंने उनके होंठ पर अपने होंठ जमा दिये और चूमने लगा।
“बस….बस…. अब कितना प्यार करेगा….!” पर इतने में तो मेरे में उबाल आ चुका था। मैंने उनका शरीर कस लिया। मेरा लण्ड खड़ा होने लगा था। शायद आंटी ने इसे भांप लिया था।
“आंटी…. आप कितनी अच्छी हैं…. कितनी प्यारी हैं….!”
आंटी ने देखा कि मैं प्यार में कम वासना में ज्यादा लिपट रहा हूँ…. तो उन्होंने भी मुझे होंठों पर चूमना करना चालू कर दिया। फिर अचानक वो उठी “अरे पहले घर तो बंद कर दूँ….!” कह कर बाहर का, पीछे का दरवाजा बन्द कर आई। और टीवी भी बंद कर दिया।
“ऐसा कर, सुनील…. तू मेरे कमरे में ही अन्दर सो जा, आज….ये तो है नहीं…. आजा….!”
मैं अंडरवीयर में ही उठ कर आंटी के साथ उनके बेडरूम में आ गया। आंटी मुझे और मेरे अंडरवीयर में उठे हुए लण्ड को देख रही थी। वो मुस्कुरा भी रही थी। शायद आज वो मुझसे ..
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