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सुमित की शादी का सफर

Wednesday, October 29th, 2008

ट्रेन अपनी पूरी रफ्तार पर दौडी जा रही थी. मुझे ठण्ड भी लग रही थी तभी मीनू की मम्मी ने कम्बल निकालना शुरू किया तो मीनू ने पहली बार बोला. रुको मम्मी मै अपना कम्बल दे देती हूँ और मै वो वाला ओढ लूंगी. मीनू ने अपना कम्बल और बिछा हुआ चादर दोनों दे दी….. मुझे बिन मांगे मुराद मिल गई क्योंकि मीनू के शरीर की खुशबू उस कम्बल और चादर मैं समां चुकी थी. मै फटाफट वो कम्बल लेकर अपनी सीट पर आ गया

… मुझे नींद तो आने वाली नहीं थी आँखों मैं मीनू की मुनिया और उसका चेहरा घूम रहा था. मै मीनू के कम्बल और चादर को सूंघ रहा था उसमे से काफी अच्छी सुंगंध आ रही थी. मैं मीनू का बदन अपने शरीर से लिपटा हुआ महसूस करने लगा और उसकी कल्पनों मैं खोने लगा.. मीनू और मै एक ही कम्बल मै नंगे लेटे हुए है मै मीनू के बूब्स चूस रहा हूँ और वो मेरे मस्त लौडे को खिला रही है. मेरा लंड मै जवानी आने लगी थी………..
हाय राम… ममम म इतना बड़ा और मोटा……….तो मैंने कभी किसी का नही देखा

मैंने पूछा “किसका देखा है तुमने… बताओ ”

मेरे भैया जब भाभी की चुदाई करते है तो मै अपने कमरे से झाँक कर देखती हूँ.. भाभी भइया के इससे अद्धे से भी कम साइज़ के पेशाब में चिल्लाती है फ़िर इस जैसी पेशाब मै तो मेरा क्या हाल करेगी… मै कभी नही घुसवाउंगी”

मैंने कहा अछा “मत घुसवाना, पर अभी तो इसको शांत करो”

“मै कैसे शांत करू” मीनू ने कहा
पूरी कहानी यहां है